इतनी भीड़ क्यों है! itni bheed kyon hai? 

जन मन को जकड़ती जंजीर क्यों है
तुम्हारे मुहल्ले में इतनी भीड़ क्यों है?

बुन लिए हैं जाल सड़कों के शहर ने
पुल के नीचे अब भी किसीका नीड़ क्यों है?
बैठे हैं पुरोधा उस पार ,’आजादी’ के
इस पार बेड़ियों में बंधी तकदीर क्यों है?

भेद तो नहीं करती कूँची कलाकार की
फिर चित्रपट पर अधूरी तस्वीर क्यों है?

तीर तक तो आती ही रहती है दूब लहर चढ़कर
यह आत्माभिमान सत्ता की तासीर क्यों है?
लगाया था जोर बराबर का, हमने भी तुमने भी
फिर राष्ट्रवाद तुम्हारे बाप की जागीर क्यों है?

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